Stack

मुझपे बहती जब द्रव की धार,
बढ़ती मुझमें ऊर्जा अपार ।
सूक्ष्म है मेरा रूप तो क्या,
करती मैं भी सीमाएं पार ॥

जंग छिड़ती, योद्धा मरते,
बदलाव आते कुछ इस प्रकार ।
शोभित होकर मैं दल-बल से,
लड़ती प्रभाव से अपरम्पार ॥

नाभिका (nucleus) तब बन कर सूत्रधार,
बदले है मेरे भाग्य-विचार ।
नियति आकस्मिक लेती मोड़,
खुलते नव-जीवन तरुण द्वार ॥

जीवन धारा नव पथ गढ़ती,
रचती मैं अपना नव-संसार ।
चहुँ ओर गूंजती लहर यही,
‘परिवर्तन ही जीवन आधार’ ॥

(यह कविता Differentiation नाम के एक जैविक घटना (biological phenomenon) पर आधारित है । जब किसी तरल/द्रव वस्तु (fluid) की धार stem cell पर बहती है, तब उसका बल बढ़ जाता है और वो differentiate होकर एक नयी कोशिका रूप (cell type) बन जाती है । )

Advertisements